कबीर साहेब पूर्ण परमात्मा
गीता जी के अध्याय 8 सलोक 9 में बताया है की वो कबीर जी ही है हो उपर के लोको से चलकर आते है और कुवारी गायो का दूध पीकर बड़े होते हुए लीला करते है और कवि की तरह परमात्मा के गुणों का वर्णन करते है
और समाज में फैली बुराई का विरोध करते है और अपने भक्तो से सत्य साधना करके सतलोक ले जाते है।
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